K

इबादत या मुहब्बत

रब की इबादत करें या मुहब्बत तुझसे करें,
खुदा कसम हम क्या करें  अब क्या ना करें।
बादलों संग इश्क़ की उड़ान भरें के ना भरें,
बह जाएं बारिश की तरह  या अब थम जाएं।
तेरी खुशबू मुझमें  यूं समा रही है,
के आलम मदहोशी का बना रही है।
तेरी जुल्फें घटा बन के छा गई आसमां पे,
अब आसमां में भी तेरी तस्वीर नज़र आ रही है।
रब की इबादत करें या मुहब्बत तुझसे करें,
खुदा कसम हम क्या करें  अब क्या ना करें।
डर लगता है कभी कभी के खुदा मुझसे नाराज़ ना हो जाए,
तेरी सूरत भी खुदा की मूरत नज़र आ रही है।
जितनी भी दूरियां हों दरमियान अपने उतना तेरे करीब हो रहा हूं,
लोहे के सिक्कों से घर भर दूं बेशक हम तो तेरे इश्क़ के गरीब हो रहे हैं।
पल पल की कश्मकश में ज़िन्दगी कम हो रही है,
ऐसा आलम है के सुबह शाम इश्क़ - ए - इबादत हो रही है।
रब की इबादत करें या मुहब्बत तुझसे करें,
खुदा कसम हम क्या करें  अब क्या ना करें।
©kaku007