✨ “इच्छाएँ और सपने” ✨
इच्छाएँ छोटी थीं कभी,
बस खिलौनों तक ठहर जाती थीं,
मगर उम्र बढ़ी तो सपनों ने
आसमानों से दोस्ती कर ली।
अब चाहत सिर्फ़ पाने की नहीं,
खुद को साबित करने की है,
उन रास्तों पर चलने की है
जहाँ हिम्मत भी थक जाती है।
सपने वो नहीं
जो नींद में आते हैं,
सपने वो हैं
जो रातों की नींद चुरा लेते हैं।
हर दिल में एक अधूरी कहानी,
हर आँख में एक संसार होता है,
जो गिरकर भी उठ जाए —
असल में वही ख़्वाबों का हक़दार होता है।
इच्छाएँ अगर पंख हैं,
तो सपने खुला आसमान,
और मेहनत वो हवा है
जो देती है ऊँची उड़ान।
मत डर तू ठोकरों से,
ये सफ़र का सम्मान हैं,
जो आज तुझे रोक रहे,
कल वही तेरी पहचान हैं।
एक दिन ऐसा भी आएगा,
जब वक़्त तेरा नाम लिखेगा,
भीड़ ताली बजाएगी
और मुक़द्दर तुझे सलाम लिखेगा। ✨
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