इंसाँ ने तो कल का पुतला बनाया है
खुद को हमेशा उस ने आप
और वो खुद ही वो कहता है
पुतले को कल के लिए तू चल।
आँखें भी तो दीं हैं रब ने
कि देख कर रख क़दम
कहता है कौन तुझ को न चल
चल सँभल के तू चल,।।इंसाँ ने तो कल का पुतला बनाया है
खुद को हमेशा उस ने आप
और वो खुद ही वो कहता है
पुतले को कल के लिए तू चल।
आँखें भी तो दीं हैं रब ने
कि देख कर रख क़दम
कहता है कौन तुझ को न चल
चल सँभल के तू चल,।।