कहानी बलात्कार की अब आम सी हो गई है,
इंसानों की इंसानियत अब हैवान सी हो गई है,
8 साल की बच्ची हो या 26 साल की युवती,
सभी को देख ना जाने क्यों है तुम्हारी निगाहे बहकती|
खरौद के इनके जिस्मो को ना जाने क्या तुम पाते हो कभी सड़क पर तड़पता छोड़ तो कभी जिंदा ही जलाते हो
बेमौत मारते हो इनको अपनी मर्दानगी दिखाते हो
मां बहन बेटी पत्नी दोस्त ना जाने कितने रिश्तो को तुम दफनाते हो
गलती समाज की भी है इसमें तुम्हें बढ़ावा देने में
हर लड़की डरती है अब रात के घने अंधेरे में
सवालों के घेरे में तुम हमेशा लड़की को लाते हो
अपनी पौरुषता दिखा सच्चाई को कहीं तुम छुपाते हो
फरियाद करो तो किससे यहां सबकी अपनी दुहाई है मंदिर बने या मस्जिद यह इनकी पहली लड़ाई है
तलवार लेकर उतरते जो लोग राम मंदिर के निर्माण पर
क्या खून नहीं खोलता उनका इन दरिंदो और हैवान पर??
©aahana
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