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इन्तजार नहीं...

कर्तव्य पथ पर चलते चलते
इन्तजार नहीं अब शाम का
शाम का आना तो अटल है
भय नहीं अब किसी बात का ।
जीवनभर बस सत कर्मन से
थक बैठा अब शाम हुई ,
जब सुना तब पता चला, वो
था प्रदर्शन अन्यत्र कुछ बात नहीं ।
मतलबी इस संसार से अब मन भरा
पर किंचित शाम का इन्तजार नहीं ।।
©-kuldeep