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_इंटरनेट के ज़माने में किताबें_

किताबें बड़ी बेबस हैं अपना दर्द बताने में
ना काफी सी कोशिश में हैं वजूद बचाने में
महसूस करतीं हैं उम्र के ढलान पर खुद को
अब बस अलमारियों में कैद हैं घर सजाने में
साहिल
©sahil123