न सिर्फ़ होलिका जली
इस बार की होली में
काम क्रोध जला डाला
इस बार की होली में
छल कपट
झूठ दुर्व्यवहार पड़े थे
साल भर दिल में
इन सबको जला डाला
इस बार की होली में
गुलामी की जंजीरे
तोड़ दी हमने
हर मय को जला डाला
इस बार की होली में
खड़ी थी खाई बनकर के
जो जात पात की बाते
सबको एक रंग में रंग डाला
इस बार की होली में
ये रंग होते है कितने
जितने धर्म भारत में
इंसानियत के पिचकारी में
भरकर एक साथ में सबको
हर एक दिल को भीगों डाला
इस बार की होली में
©ramnivas
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