ऐसी क्या बात हुई ?
जो तुम मुझसे रूठ गई
तुम्हारा इस कदर रूठना
मेरी रातों की नींद चुरा ले गई
तुम्हारा चुप रहना
मुझसे गवारा नहीं होता
क्योंकि प्यार एक बार होता
ये कभी दुबारा नहीं होता
कैसे समझाऊं मैं स्वयं को ?
क्योंकि ये दिल मानने को तैयार नहीं होता
बहुत बार समझाया है , इस दिल को
लेकिन ये दिल तुम्हे भुलाने को तैयार नहीं होता।
- अजय सिंह यादव
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