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इस लहेराते समांदर पर मुझे शीशे का मकान बनाना है इस मचालते आसमान में मुझे खुद…

इस लहेराते समांदर पर
मुझे शीशे का मकान बनाना है
इस मचालते आसमान में
मुझे खुद को चाँद बनाना हैं
मैं किसी और की तरह क्यूं बनू
मुझे इस शहर में खुद की
अलग पहेचान बनाना है
©Vikram Sin