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इश्क़ एक पन्ना

सास मेरी अटकी है।।
रूह भी कही भटकी है।।
न जाने किस मोड़ पे हु मै।।
राहे मेरी भटकी है।।
थोरा तु पास आ तो मेरे।।
दिल का हाल ब्या कर दूंगा।।
अकेला पर गया हु मै ।।
आँखे भारी भारी सी है।।
तु करीब तो आ खुद को तेरा कर दूंगा।।
तु एक बार केहदे की जाना जान देदे अपनी।।
मैने तुझको अपना रकीब माना है।।
अगर लकीरों मे तु नही तो ...
तेरी कसम इन्ही पन्नो मे खुद को गुमशुदा कर दूंगा।
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।।।। सुभम सिंह।।।।
©subham2001