क्या दास्तां ए मोहब्बत बया किया आपने,
जलील ख़ुद ही करके, जला दिया आपने।
वो खत नहीं, नशा ए यार ही तो था,
अरे, कितना भी बुरा था लेकिन प्यार ही तो था।
चलो माना दगा देना फितरत है तेरी,
पर यू तूने खुदगर्ज ,
रूह भी नापाक कर दी मेरी।।
मै हसता हूं अक्सर , रोता पर नहीं,
अश्क आंखों में लेकर सोता तो नहीं।
सुना है अाज कल तू सोती बहुत है,
ख़्वाब कॉलेज में आकर सजोती बहुत है।।
पता चला है कि तुझे प्यार हो रहा है,
तूझे आजकल बुखार हो रहा हैं,
ये बीमारी है या हवस ए इश्क़ है,
तेरी बाद तो सबब कत्ल ए इश्क़ है।।
मुझे याद है तेरे साथ गुजारी हुई राते,
वो नकली प्यार,वो मतलबी बाते,
कुछ ऐसा हो गया अब की तू वो ना रही,
तेरे से प्यारा तेरा गम ही सही।।।।
©sky321
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