कि तुम देखना बाद इतनी हसीन है,
कि मुझे इश्क मेरे कातिल से हो गया।
कि तुम देखना बाद इतनी हसीन है,
कि मुझे इश्क मेरे कातिल से हो गया।
सांवरे से रंग में, खुले बाल कर, उभरती लबों की मुस्कान, माथे पर एक बिंदिया और उसकी लाल साड़ी मैं वो मेरे सामने चली आई।
कि उनके आते ही दिल की धड़कन बढ़ने लगी, सिर उनका नशा छाया और बेहोश।
मिजाज़ ऐसे थे कि,
मिजाज़ ऐसे थे कि, मेरे कातिल को खबर ना थी कि कुसूर उनका है, और वो हमसे हाल पूछने चले आए
की हमसे हमारा हाल पूछने चले आए।
की उन्होंने फिर से हमारा हाथ पकड़ा और हम इस बार उनकी आंखो में मदहोश हो गए।
©rishab
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