किया था तुझसे प्यार इबादत समझकर
तूने ठोंकर मार दी मुझे पत्थर समझ कर।
हाजिर किये थे तेरे लिए अपनी जां और जिगर
तूने नहीं की जरा भी उसकी कदर।
तुझे वो सब दिया जो हर किसी को हासिल नहीं है
पर अब जा तु मेरे काबिल नहीं है।।
तेरे खातिर दुनिया से लड़ गए थे हम
तेरे इश्क मे अपनों से भीड़ गए थे हम।
गद्दारी खुद से खुद ही कर गए थे हम
और अपने सपनो से दूर हो गए थे हम।
तेरे लिए रास्तो पर पड़े रहे, मंज़िल भी कामिल नहीं है
पर अब जा तु मेरे काबिल नहीं है।।
आंसू अपने पोछकर भी तुझे हँसाया था
हारकर भी मैने तुझे सदा जिताया था।
बीमार होती थी मैं पर हाल तेरा पूछा था
बेदर्दी तेरे हर दर्द को अपना मैने बनाया था।
नामुराद था और है तु कोई फ़ाज़िल नहीं है
पर अब जा तु मेरे काबिल नहीं है।।
क्या क्या नहीं किया तुझे हासिल करने को मैने
अपने ही हाथो दुनिया उजाड़ दी अपनी मैने।
कहाँ कहाँ सज़दा नहीं किया तेरे खातिर मैने
मेरे बेइंतहा इश्क़ का मज़ाक बना दिया तूने।
सरेआम क़त्ल कर दिया मेरा, पर तु कातिल नहीं है
पर अब जा तु मेरे काबिल नहीं है।।
✍️शिवन्या
©04shivanya
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