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जाड़े की धूप।।

तुझे धूप कहूं जाड़े की या काहुं पूर्णिमा का महेताब।
कहूं जल की शीतलता या किसी शायर का ख्वाब ।।
गीत कहूं किसी गायक का या हो सावन की बरसात।
तुम हो खुशियां जीवन की , हो तुम कोई सुनहरी सी सौगात।।
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