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जाने क्या शिकायत

जाने क्या शिकायत है उन्हें
हर बात हमारी खलती हैं
अनजान है वो या होश नहीं
किस बात से वो जलते हैं
क्यों इतनी बेरुखी में होते है
हर बात पर बस टोकते हैं
इल्जामों के कश्ती में
हर बार हमे भेजते है
ये दरिया बनाया है नासमझी का
या हमे कोसने का तरीका है
अपने और अपनो के गुस्से के दलदल में
बस हमारे पैर धसते हैं
©namrata05