क्या कहा तुमने,तुम जा रही हो। तुम कभी नहीं जा सकती और दूसरी बात ये कि अगर तुम गई भी तो सिर्फ तुम्हारे लिए जा पाओगी,मेरे लिए तो तुम यहीं रहोगी हमेशा। वो दूर जो चमकता तारा दिख रहा है वो तुम्हारे नाक की नथनी का नगीना है। तुम्हारे फोन की स्क्रीनलाइट से चमक रहा है और तुम तो रखती हो स्क्रीनलाइट कम,तो चेहरा नहीं दिख रहा बस नगीना दिख रहा है और ये जो ठंडी हवा आ रही है मेरे पास तुमने ज़रूर अपने बाल खोल कर झिड़क दिए होंगे। कल हवा के साथ बारिश की बूंदे भी आ रही थी मुझे थोड़ा गुस्सा आया,मैंने कितनी बार कहा है तुम्हे कि नहा कर मेरे मुंह पर बाल ना झिड़का करो मगर ये तो तुम्हारी पसंदीदा शरारत है ना,तुम कहां मानने वाली हो ये जो दूर हाईवे से गाड़ियों का मध्यम मध्यम शोर आता है,लगता है जैसे तुम फोन पर कोई पुराना गाना गुनगुना रही हो।कोई तारा टूटता है तो लगता है तुमने मुझे ख़त लिखना शुरू किया हो मगर तुम्हारे पेन के ना चलने पर तुमने उसे जोर से झिड़का हो और स्याही की एक बूंद निब से निकल कर गिर रही हो। मुझे बहुत खुशी होती है कि अब तुमने ख़त लिखना शुरू कर दिया है और जल्दी ही वो मुझे मिल जाएगा।रात को गाने सुनते हुए सोने पर लगता है कि तुम मेरे पास मेरे सीने पर सिर रख कर मुझे धीमी आवाज़ में कोई किस्सा सुना रही हो और मेरी आँखों में नींद छाने लगती है।मैं सोने ही वाला होता हूं कि सुबह का अलार्म बज जाता है और "तुम कभी नहीं जा सकती" का भ्रम टूट कर बिखर जाता है। कभी कभी कुछ सपने भी कितने हकीकत लगते हैं ना?
©drishtanty
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