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जाति क्यों नहीं

जाति क्यों नहीं
देख कर काम को
नहीं देखती इंसान
क्यों नहीं इंसान
तुझे किसने बनाया
तू बन गई समस्या
जाती है जाति नहीं
शब्द भी अर्थ है
फर्क समझने का
इंसानियत शायर
लेखक साहित्य
व्यंगकार या कवि
यह सब काम है या
तेरी जाति की नस्ल
तू ना सोच इतना
यह कुछ मूर्खों की
की पाखंड मूर्ख
जो लोग झूठ को सच
बोल कर ठगे गए
उसे बहरूपिया
पाखंडी तो कहें
जो स्वर्ग और नरक
लोगों को मूर्ख बनाता
बातों पर कैसे भरोसा
इतना समझ
जाति नस्ल इंसान है
धर्म धंधा है
जाति गोरख धंधा
©lawnishtha