जब भी खुल कर मुस्कुरा देते है
कोई आंसू ताक में रहते है
मंजिल के करीब होते ही
कुछ राहें बिछड़ने लगते है
हज़ार आंसुओ में एक
हमारा मीठा होता है
लाखों की तादात में मुस्कान
एक हमारा फीका होता है
आधी धूप आधी छाव सी
जिंदगी ये सूखी तालाब सी
पानी की चाह में प्यासे है आते
लेने की चाह में सब कुछ है लुटाते
हम भी इसी तरह से फंसे हैं
रोते रोते बेमतलब हंसे हैं
©namrata05
N