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जिदंगी

दिल के टुटने पर भी हँसना शायद जीना इसी को कहते है
ठोकर लगने पर भी मंजिल तक पहुँचना शायद तलाश इसी को कहते है
किसी को चाह कर भी ना पाना शायद चाहत इसी को कहते है
टुटे हुए दीपक को जलाना शायद उम्मीद इसी को कहते है
गिर जाने पर भी खडा होना शायद हिम्मत इसी को कहते है
और ये उम्मीद ,हिम्मत , तलाश शायद जिदंगी इसी को कहते है
©kamalsingh