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जीवन

यह जीवन एक राजनीति का पटल है
प्रभिवित होना इससे हमारा अटल है
माना कि पग पग पे धोका है छल है
आंखें चुराना क्या समस्या का हल है
सज्जनो का हृदय अशक्त , मन धूमल है
राक्षसों ने ना जाने बनाए कितने दल है
विनाश समीप है, होना आज या कल है
प्रतिरोध के लिए बचा बस यही पल है
यह अनिश्चितता चित की बड़ी विकल है
दुर्बलता हमारी ही अत्याचारी का बल है
©shahidkhan