जीवन नदी की धारा, चंचल, अथाह,
हर मोड़ पर नई कहानी, अनसुलझी सी व्याख्या।
पल-पल में बदलता, रूप अनेकों,
जीवन का अर्थ तलाशता, मन विवेकों।
कभी हँसाती, कभी रुलाती,
संघर्षों से भरी, पर आशा से जोड़ती।
सुख-दुख की माला, जीवन का सार,
इन्हें पिरोए बिना, अधूरी है हर बार।
जीवन का अर्थ न एक, न अनंत,
हर पल में छिपा, एक नया विचार, एक नई भावना।
खोजो खुद में, जीवन का अर्थ,
ज्ञान, प्रेम, सेवा में है शायद वह सनातन पर्थ।