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जीवन पथ 💕✍️💕

जीवन के नित झंझावात से
मैं उठ चला निज राह बनाकर
बह चला निज कर्म के पथ पर ।।
मैंने इच्छा को स्वुद्देश्य बनाकर
बढ़ चला मैं संघर्ष के पथ पर ।।
मेरे विचार मेरे पथ के साथी ।
सहचर , सहगामी हर व्यथा के साथी ।।
मै तज चला निज रक्त के बंधन बन ।
बन गया स्व विचार का मंथन ।।
मेरी कल्पना विचार बिंदु में ।
जब मैं खोया आचार सिंधु में ।।
छा गए वर्ण मम दिव्य पटल पर।
बनकर साक्ष्य मम हृदय ग्राम में ।।
मेरी कल्पना शिव तत्व बनेगी ।
आत्म तत्व प्रेमत्व बनेगी।।
भू - मण्डल के संतन योगी।
मेरे आदर्श सदाशिव योगी।।
मैं बढ़ चला अज्ञात मार्ग पर ।
स्वयं से विस्मृत सुदृढ़ मार्ग पर ।।
मेरी कलम से 💕✍️💕
अभिलाषा शर्मा 🌼

©abhilashas