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जिम्मेदारी हम भी निभाते है ।

लड़के है हम,
हम भी जिम्मेदारी निभाते है।
लड़किया होंगी पापा की परिंया,
तो हम भी माँ के लाडले कहलाते है।

लड़के है हम,
हम भी जिम्मेदारी निभाते है।
वो बचपन से शुरू होता सफर हमारा,
हमे भी सब बड़े प्यार से नहलाते हैं।
माँ पापा का हात थामकर हम भी चलना सिख जाते हैं।
जब होती पाठशाला की शुरुआत,
हमे भी तो सब प्यार से छोड़ने आते हैं।
माँ के हात से खाए एक निवाले से हमारे भी पेट भर जाते हैं ।
उन छोटी आँखों से दुनिया देखने के सपनो मे हम भी गुम हो जाते है।
लड़के है हम,
हम भी जिम्मेदारी निभाते है।
लड़किया होंगी पापा की परिंया,
तो हम भी माँ के लाडले कहलाते है।
जैसे जैसे होते बड़े हम दुनियादारी हम भी सिख जाते है।
जिम्मेदारी के नीचे कही बार हमारे भी कंधे दगमगाते है।
आगे हमे क्या करना है,
हम कही बार सोच नहीं पाते हैं।
अपनो से होता हमे भी प्यार,
पर हम नही बतलाते हैं।
सबकी जरूरते पूरी करने के लिए,
अपनो से दूर कही हम भी कमाने जाते है।
उदासी चहरे पे आये तो वो भी नही दिखा पाते है।
जिससे हम करते प्यार,
उसके लिए जान तक लगा देते है।
जब खाते है धोका हम,
तब शराब को अपना बनाते हैं।
रोना हमे भी आता हैं,
पर आँसू हम छुपाते हैं।
लड़के है हम,
हम भी जिम्मेदारी निभाते है।
यारो संग यारी हम भी निभाते हैं,
जब दोस्त को कोई खतरा,
खतरों के सामने दतकर खड़े हो जाते हैं।
बहिनो को बतलाते नहीं हम,
पर उनकी परवा के लिए किसी से भी लड़ जाते हैं।
जब आती हैं समझ हमे,
पापा के कंधे का बोझ हम भी उठाते है।
मा के लाडले है हम,
माँ के पैरों की जन्नत पाने के लिए सर हमेशा झुकाते है।
फिकर हमे सब बातो की होती हैं,
कहीं रातों तक सोच मे डूब कर हम सो नहीं पाते हैं।
कही बार हताश हो कर ज़िंदगी से हार मानने का सोचते हैं।,
पर अपनो का सोचकर ना जाने क्यु हमारे पैर पीछे आते हैं।

पत्नी जब आए घर मे दिल से अपना बनाते है,
माँ का प्यार इतना गहरा की भुलाना नही चाहते है ।
जो आए अपना घर छोर हमारे लिए,
उसे रुलाना नहीं चाहते हैं।
माँ और पत्नी के झगड़े में हम ही फस जाते है।
बिना किसी कारण रूठे हुवों को,
बिना गलती किये भी हम मनाते है।
परिवार की डोर से बंधे हैं हम,
कभी बेटे, भाई, पति, पिता के रूप में
हम भी तो कहलाते है।
लड़के है हम,
हम भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
अपना धर्म निभाते हैं ।
©.vVv.