जिंदा लाश किसकी..........
कुछ तो बोलो मानव.........
नहीं जिंदा है वह...........
सांस रोकने के बाद.......
क्या हुआ उसको ........
सवाल उठते रहे.....
सवाल हर कोई पूछता है...
जवाब नहीं मिलता...
कैसे कोई बताएं...
इलाज नहीं मिलता...
गरीबी की या अमीरी की...
इलाज संभव नहीं भूख का...
खाने को दाना नहीं...
इलाज कहां से करूं..
दवा या दारू मिलता नहीं....
शायद गरीबी बीमारी है...
कुछ तो बोलो...
जानते हो सबको...
कभी अखबार में छपती..
शव वाहिनी नहीं मिली..
अंतिम पड़ाव में दुत्कार...
शर्म नहीं आती सरकार...
व्यवस्था की उंगली दबी...
क्या वोटों की राजनीति....
कुछ तो सोचो....
कब तक चुप रहोगे तुम...
अब नहीं बोले तो कभी नहीं...
सब की राजनीति नहीं....
हक और अधिकार की बात...
सत्ता में मेरी हिस्सेदारी...
कुत्तों की टुकड़ों की बात...
वोट देते हैं चुनावों में...
चुनकर कर संसद और विधान में...
कब तक आओगे कर्ज..
मेरी मौत का मेरे शव..
चुप नहीं मूकदर्शक..
चिंता ना कर अंत तेरा.....
राजनीति 4 दिन की है...
चिंता चिता बन गई....
आंखों के आंसू सूखे हैं...
मौत पर कौन रोया है....
शायद इंसानियत मरी है....
©lawnishtha
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