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जिंदगी

ख़्वाब दिखाया क्यों तुमने
ललक दिखाए क्यों तुमने
ऐ जिंदगी....
दिहकानियत तो पहले भी थी मुझमें,
छोड़ चुका था सारी उम्मीद
फिर,हौसलों का जोश दिखाया क्यों तुमने।
नजरो में मंजर क्यों बसाया
दिल में घबराहट का खंजर क्यों धासाया
ऐ जिंदगी....
सुकून से तड़प लेता भरसक
ऐसा मीठा दर्द सह नहीं पाता
शान, सोहरत का जनत दिखाया क्यों तुमने।
©Nilesh K