हे जिंदगी तुम्हे ढूंढता हूं हर गली महोले मे,
तेरी आज मे कलकी फिकर, कलमे फिकर आज़की थी,
मेहफिलो में तू हाजिर नहीं पर दावे तेरे किए जाते हैं,
इस मेले में साथ होने पर भी ढुंढता हु तुझे,
तेरे बिछड़ने पर न जाने मुजमे मुझको मैं ही भूल जाऊं।
©smitanghan
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