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जननी

तू कड कड मे बसती
पेड़ो की डाली है
तू कड कड मे बसती
फूलों की लाली है
ईश्वर की अशीम कृपा से
तू तो मेरी जननी है.....
मेरे सारे कष्टो को हरती
तू तो ऐसी देवी है
पानी की लहरों मे बसती
तू तो मेरी जननी है
ज्वला है तू, उस अग्नि की
नीर है तू, उस सागर की
तेरे अनेको धाम है
एक प्रकृति तेरा नाम है
तू कड कड मे रहती
तू आसमान के सामान है
इसीलिए,
जननी तू तो महान है..
इसीलिए,
जननी तेरा नाम है.....
-Durga(Diya)
©diyadeepak