ज़रा गौर से देख इन हाथों को और बता ऐ बाबा,
क्या मेरे नसीब में भी छुपा है कोई सवेरा बाबा।
थक चुकी हैं आँखें मेरी खुशियों का रास्ता तकते-तकते,
क्या इन लकीरों में लिखा है कभी सुख का फेरा बाबा?
अपनी हथेलियाँ खोलकर रख दी हैं मैंने तेरे आगे,
अब तू ही पढ़ इन्हें, कि किस्मत के क्या हैं इरादे।
देख कर बता ऐ बाबा, क्या सुख की कोई लकीर भी है,
या उम्र भर सिर्फ आँसुओं से ही निभाने हैं वादे?
💞 Sona 💞
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