बाहर ये बारिश ये हो जो रही...
ये किसकी मेहनत का परिणाम है
ये एक सवाल मेरे मस्तिष्क में
सुबह से शाम कौंध रहा
ये किसकी मेहनत का परिणाम है जो
हर किसान अपनी लाचारी
पर फूट-२ कर रो रहा
क्या इसमें वो ही दोषी है
जो शूल प्रकृति उसके कोंच रही..
इस पर्यावरण प्रदूषण में
हम सबकी भागीदारी है
अभी वो रों रहा मगर
अगली बारी हमारी है
ये वार्निंग-२ का खेल प्रकृति
अब जायदा दिन ना खेलेगी
करके विध्वंश इस धरती का
हम सबको धर के पेलेगी.......२
Shubham Kumar Maurya
ek kishan
©mshubham
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