हे कान्हा दिल मे तेरे प्यार की ज्योत जगाये बैठी हु
एक दिन सुनूंगी बांसुरी की धुन यही स्वप्न सजाये बैठी हु !
गोपी हु तेरी,, तेरे इंतजार मे आँख बिछाये बैठी हु
तेरे दर्शन की आस मे माखन की मटकी लाये बैठी हु !!
ना राधा ना मीरा ना रुक्मणि सी प्यारी हु
मै एक अबला गोपी तेरे चरणों की दासी हु !!
तेरे चरणों की रज पाने को घर की दहलीज सजाये बैठी हु,, हे कान्हा अपने दिल मे तेरे प्रेम की ज्योत जगाये बैठी हु !!
कान्हा तेरे विरह मे नैनों मे अश्रु धार समाए बैठी हु
तुझसे मिलन की लग्न मे,,मै सारी दुनिया भुलाये बैठी हु !!
हे कान्हा अब तो दर्शन दो,, कर दो इतना उपकार
तब ही होगी मुक्ति मेरी,, करूंगी भवसागर पार !!
कान्हा तेरे इंतजार मे -----
एक प्रयास मात्र - हिमांशु पन्त
©himanshup
H