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कातिल इश्क

कातिल इश्क
मुझको खंजर से ना मार ऐ दिलरुब ।
मुझको खंजर से ना मार ऐ दिलरुब ।।
तेरी आदतें ही काफी है मेरी जान लेने के लिए ।