कैसे कह दूँँ ..
मेरे दिल मॆ क्या है!!
बेटी हूँ ना इसलिए
अपनी पसंद छुपाती हूँ
दूसरों के लिए खुद के गम भी भूल जाती हूँ
जब सबकी आँखे नम होती है
तो एक धुन बन जाती हूँ
बेटी हूँ।।।
इसलिए कभी पत्थर दिल इंसान बन जाती हूँ।।।
कुछ पाने की चाहत मेरी भी है
लेकिन परिवार के लिए
उस चाहत को भी
एक सपना समझ भूल जाती हूँ
आँखों के हज़ारों सपने
यू ही तोड़ आती हूँ
बेटी हूँ;
शायद इसलिए गम मॆ भी मुस्कुराती हूँ
©richapriya
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