कौन है तू!
तू दिन है, तू शाम है
तू धूप है,तू छाव है
तू उगता सूरज है,तू ही ढलता रवि
तू वो चाँद है जिसके हज़ारो दाघो के बाव्जूद सुन्दर है
तू सवाल है, तू ही जवाब
तू संकट है,है तू ही उपाय
तू यार है ,तू प्यार है
तू रक्षक है,है तू ही सहायक
तू दर्द देने वाला,तू ही मुस्कुराने की वजह
तू गिराने वाला, तू ही उठाकर राह दिखाने वाला
है तुझ ही से नफरत मुझे,पर उतना ही इश्क
समझ नहीं आता आखिर मेरे लिये क्या है तू,
है कौन तू?
©an_obscure
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