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कबतक...

अब कबतक दूंगी मैं ख़बर उनके ही ख़ैरियत का,
कोई मुझसे भी आकर पूछो, की मेरा हाल क्या है,
अब थक गयी हुँ मैं भी, सबका जवाब देते-देते,
अरे कोई मुझसे भी पूछो की मेरा सवाल क्या है,
नहीं हुँ मैं कठपुतली, या कोई मिट्टी का खिलौना,
मेरे ज़ज़्बात, मेरे दर्द का भी तुम्हें, मलाल क्या है,
मैं ना मौसम हुँ, ना ही रंग हुँ, मेरे ज़ख्म का रंग एक है,
इसे कुरदनें या मरहम देने का भी, तुम्हारा ख़याल क्या है..??
©priya_vish