नतमस्तक है हर कोई तुम्हारे इस जज्बे के सामने फर्ज है
हर कोई नहीं पहनता खाकी को सेवाएं कुछ लोगों फर्ज है
हर कोई नहीं समझता खाकी का दर्द सिर्फ फर्ज अपना है
हर संकट में एक खाकी नजर आती है चाहे वह कुछ भी हो
शायद खाकी कवच है जो सुरक्षा प्रदान करता है हर नागरिक
नागरिक का भी दायित्व बनता है पुलिस खाकी को सम्मान दें
कभी यह नहीं कहा कि ड्यूटी कब खत्म कब शुरू हुई खाकी है
हर तरफ सुरक्षा हर तरफ जिम्मेदारी सिर्फ खाकी अमित छाप है
दौड़ बदला सभी बदली बदल गए दिन और रात नहीं बदला तो सिर्फ खाकी का कर्तव्य और उसका कार्य शक्ति कौशल सुरक्षा
हर विभाग में कुछ अपवाद तो बहुत होते हैं मगर कुछ लाजवाब
मानवता क्या होती है शायद खाकी और सफेद के अलावा कोई
सम्मान हर कोई दिल से करें और साथ ही सुरक्षा और संरक्षित कुछ अपवाद आने शर्मसार खाकी की मगर कुछ में सम्मान दिया
©lawnishtha
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