खामोशी

शब्दों के पार एक दुनिया बसी है
जहाँ सन्नाटा अपनी भाषा लिखता है

मौन की गहराई में छुपे हैं सागर
हर चुप्पी में एक अनकही पुकार है

कभी-कभी खामोशी भी रोती है
आँखों में आँसू, मन में तूफान लिए

मेरी खामोशी मेरी ताकत है
जो कह नहीं पाता, वह सह लेती है