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खामोशी

ये शाहर का वीरान मंज़र...
हर शख्स हैरान है देख के ये खंडहर...
ज़ुबाँ खामोश और खौफ है दिल के अंदर...
हरसू फैला है दौर ए गर्दिश शहर दर शहर...
Deep
©pradipti