P pradipti hi 23 जुलाई 2025 खामोशी ये शाहर का वीरान मंज़र... हर शख्स हैरान है देख के ये खंडहर... ज़ुबाँ खामोश और खौफ है दिल के अंदर... हरसू फैला है दौर ए गर्दिश शहर दर शहर... Deep©pradipti