खामोशी

शब्दों के पार एक दुनिया बसी है
जहाँ सन्नाटा अपनी भाषा लिखता है

मौन की गहराइयों में छुपा एक संगीत
जैसे हृदय की धड़कन, धीमी और रहस्यमयी

कभी-कभी खामोशी भी बोलती है
आँखों से, मुस्कुराहटों से, चुप्पी के सागर में

शब्द नहीं, पर अर्थ भरे पल
जहाँ मन की गहराइयाँ स्पष्ट होती हैं