खामोशी
खामोशी से हम बातें बुनते है, वो बड़ी शिद्दत से बोलते है खामोशी को, हम खामोशी को बड़े प्यार से सुनते है।
वो करते है आँखों से हमारे काजल की तारीफ़, हम भी पलके झुकाकर धन्यवाद करते है, वो बड़ी शिद्दत से बोलते है खामोशी को, हम खामोशी को बड़े प्यार से सुनते है।
वो बादल बनकर गरजते है खामोशी से, हम बुँदे बनकर खामोशी से बरसते है, वो बड़ी शिद्दत से बोलते है खामोशी को, हम खामोशी को बड़े प्यार से सुनते है।
मैं खुशबू सा साथ निभाती हूँ, जब वो खामोशी से फूल बनकर खिलते है, वो बड़ी शिद्दत से बोलते है खामोशी को, हम खामोशी को बड़े प्यार से सुनते है।
सुनहरी धूप बनती हूँ मै, जब वो सुरज बनकर उगते हैं, सुहानी रात बनती हूँ मै, जब वो चाँद बनकर चमकते है, वो बड़ी शिद्दत से बोलते है खामोशी को, हम खामोशी को बड़े प्यार से सुनते है।
मै विश्वास से एतबार करती हूँ उनका, जब वो खामोशी से प्यार का इजहार करते है, वो बड़ी शिद्दत से बोलते है खामोशी को, हम खामोशी को बड़े प्यार से सुनते है।
जिस्म से नही हमे प्यार, हम तो उनकी रूहानियत को प्यार करते है, मोहब्बत को उनकी अपनी सांसे बना ली, उन पर ही जीते और मरते है, वो बड़ी शिद्दत से बोलते है खामोशी को, हम खामोशी को बड़े प्यार से सुनते है।
श्री कृष्ण मानकर उनको, मीरा सी लगन लगाई है खामोशी से, वो आसमाँ करेंगे धड़कन को, हम खामोशी से दिल की जमीं करते है, वो बड़ी शिद्दत से बोलते है खामोशी को, हम खामोशी को बड़े प्यार से सुनते है।
~Mehak Dochania
©mehak_26
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