शब्दों की धारा रुक गई आज
मौन में डूबी हर एक साँझ
कानों में गूँजती अनकही बातें
मन की गहराइयों में छुपी आवाज़ें
आँखें कहती हैं कई कहानियाँ
होठों पर अटकी हुई मौन मनुहारें
सन्नाटे में भी कितनी आवाज़ें
छुपी हुई हैं मेरी खामोशियाँ
शब्दों की धारा रुक गई आज
मौन में डूबी हर एक साँझ
कानों में गूँजती अनकही बातें
मन की गहराइयों में छुपी आवाज़ें
आँखें कहती हैं कई कहानियाँ
होठों पर अटकी हुई मौन मनुहारें
सन्नाटे में भी कितनी आवाज़ें
छुपी हुई हैं मेरी खामोशियाँ