खामोशी का मौसम

जब खामोशी ने बिखेरा अपना अंधेरा,
दिल की गहराइयों में उतरा ये सवेरा।

शब्दों की ना होती कोई गिरफ्तारी,
खामोशी की होती अपनी ही खुद्दारी।

एक ना सुनाई देती कोई सदा,
फिर भी सुनाई देती है दिल की दुआ।

खामोशी में होती हैं बातें हज़ार,
आँखों से बयां होता है प्यार।

इस खामोशी की गहराई में कहीं,
छिपे होते हैं अनकहे सपने सही।