इस खामोशी के महल में,
शब्दों की गूँज बसी है।
अनकहे जज़्बातों की,
एक अदृश्य तस्वीर खिंची है।
चुप्पी साधे ये दिल,
कहना चाहे हजारों बातें।
खामोशियों में ही सही,
बुनती रहती है यादों की सौगातें।
इस खामोशी के महल में,
शब्दों की गूँज बसी है।
अनकहे जज़्बातों की,
एक अदृश्य तस्वीर खिंची है।
चुप्पी साधे ये दिल,
कहना चाहे हजारों बातें।
खामोशियों में ही सही,
बुनती रहती है यादों की सौगातें।