खामोशी की भाषा

खामोशी एक गहरा सागर,
जहां शब्द बिन भी संवाद हो।
लहरों की मधुर चुप्पी में,
दिल से दिल की बात हो।

आंखों की चमक, बिन कहे,
कह जाती जीवन के अनकहे राज़।
खामोशी में छिपे होते हैं,
भावनाओं के अनगिनत रंग, अनेक साज़।

कभी ये खामोशी सुकून लाती,
कभी तूफ़ानों की पूर्व सूचना।
कभी ये सहपाठी बन जाती,
तो कभी रातों की चुप्पी का खूबसूरत बहाना।

खामोशी, भाषा है दिल की,
जिसे समझने के लिए शब्दों की जरूरत नहीं।
बस एक खुला मन, और संवेदना की गहराई,
यही है खामोशी की असली पहचान, और इसकी कहानी।