निकला सड़कों पर तो देखा भीड़ वहां पर भारी थी।
खून से लथपथ पड़ा था कोई मरने की तैयारी थी।
खड़े थे सारे ऐसे जैसे कोई तमाशा चलता हो।
सुबह से तपने वाला सूरज ठंडा हो कर ढलता हो।
फोन थे सबके हाथों में तो कैद किया हालातों को।
उसको घायल छोड़ वहां सब उड़ा रहे थे बातों को।
वृक्षारोपण करते हैं तो,फोटो लेकर इतराते।
मदद जो कोई घायल मांगे तब है सारे कतराते।
किस हक से ये कहते हो कि हम सारे हैं एक यहां।
भरी है दुनिया इन्सानों से पर गिनती के हैं नेक यहां।
by=Goutam sharma 😡
©goutam
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