कल की रात सोए नहीं थे बस हम जागे
जाने किस किस के खयाल से हम भागे
पतंग उड़ाते थे बचपने में, अब तो बस
चरखी है और उसपे लिपटे हुए हम धागे
बस कहते हो जीत जाओ इस दौड़ में तुम
है अलग राह, ना कोई पीछे ना हम आगे
औरो को तो समझा पर खुदका क्या करू
दुआ करते है तो सोचते है क्या हम मांगे
नींद जाने किस दुनिया में ले जाए शाहिद
डरते है हर लम्हा, आंखें बंद पर हम जागे
©shahidkhan
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