मैैं इतनी काबिल बन जाऊॅ
कि किसानो को मदद् दे पाऊॅ
खुद आॅखों से देखी है मैने चैत्र के समय इनकी हालत
भूखे प्यासे पसीना बहाते हुए बेचारे कर रहे हैं मेहनत
क्या मिला किसानो को उनकी परिऋम का फल
भाव लगे हैं अनाज के बाजार में जैसे बिताये हों उन्हौने महलों में कल
मैं इतनी काबिल बन जाऊॅ
कि किसानो को मदद् दे पाऊॅ
कुछ भी मिला नहीं इनको फिर भी बराबर हौसला है
आया मौसम सावन भादों का फिर से खेती का फैसला है
घर के नाम पर मकान नही खेतों में अच्छी फसल नही
तन ढकने के लिए ढंग के कपङे नही तब भी इनको कुछ भी मसला नही
मैं इतनी काबिल बन जाऊॅ
कि किसानो को मदद दे पाऊॅ
अपने देश वासियों के लिए भूल गए हैं खुदका सुख
लेकिन भारत के इन्सानो ने मुङकर नहीं देखा इनका दुःख
बहुत से लोग आराम कर रहें हैं लौकडाउन में
बिना किसी परवाह के किसान जुटा है खेतों में
मैं इतनी काबिल बन जाऊॅ
कि किसानो को मदद् पाऊॅ
मैं भी बेटी हूॅ् एक किसान की
दिल करता है आग लगा दूॅ मतलबी लोगों की
क्यूॅकी बहुत ही मुशकिल है ऐसा वक्त गुजारना
जहाॅ बनती चूल्हे से रोटी वहाॅ भी पानी का टपकना
मैं इतनी काबिल बन जाऊॅ
कि किसानो को मदद् पाऊॅ
दवा करवाने के लिए रूपए नहीं हैं
फिर भी उत्पादों कि कीमत हाइ-फाइ है
समय का पहिया चलता है और चलता रहेगा
अभी जो अपनी आॅखों से देख रही हूॅ फिर वापस आऐगा
मैं इतनी काबिल बन जाऊॅ
कि किसानो को मदद् पाऊॅ
मैं कुछ मांगती हूॅ् इस जिंदगी से
कि किसानो को ना गुजरना पङे इस बंदगी से
मैं इतनी काबिल बन जाऊॅ
कि किसानो को मदद् दे पाऊॅ
- जूली राजपूत
©julu
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