किस्सा ऐ जिदंगी
कभी हँसा देती है तो कभी रूला देती है
कभी थका देती है तो कभी हरा देती है
कभी थम सी जाती है जब भी ऐसा तु करती है
इंसान को जिंदा लाश बना देती है
sine wave की तरह चलती हो ( means उतार चढाव), समुन्दर की लहरो सी बहती हो
समझ नही पाता ,कोई पकड नही पाता तुम्हे
उलझन मे है रहता वो कि तु कैसी है क्यो तु इतना तु इठलाती है
जो भी तुम्हे समझने की कोशिश करता है उसे अपना तुम बना लेती हो
गिला,शिकवा क्या करू तुझसे गर होती सामने तो कई सवाल करता मै
थोडी अच्छी भी हो तुम, हर मोड पर कुछ न कुछ सिखा जाती हो
जो तुम से सिख गया , जो तुम्हे समझ गया
महान उसे बनाती हो तुम
ऐ जिदंगी तुम जैसीभी हो सबकी अपनी हो
न तुझे कोई छीन सकता है न कोई बांट सकता है
तुम्हे तो सिर्फ जी सकते है
ज्यादा खुश ना हो हमारे बिना कोई वजूद नही है तेरा
अगर तु नही तो हम नही और हम नही तो तु नहू
मगर तु सबकी अपनी अपनी है
- कमलसिंह
©kamalsingh
K