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किताब में, न किसी कहानी में। उस दुनिया का नाम था “सपनों का आकाशलोक”। वहाँ बादल…

किताब में, न किसी कहानी में। उस दुनिया का नाम था “सपनों का आकाशलोक”। वहाँ बादल सिर्फ पानी नहीं बरसाते थे, बल्कि यादें, उम्मीदें और कभी-कभी भूले हुए सपने भी बरसाते थे।
उस आकाशलोक में एक छोटी-सी परी रहती थी—नाम था आयरा। उसके पंख चाँदी जैसे चमकते थे, पर उसकी सबसे बड़ी खूबी उसके पंख नहीं, उसका दिल था। वह हर रोज़ धरती पर झाँकती और लोगों के दिलों में छिपी अधूरी इच्छाओं को देखती। उसे सबसे ज्यादा दुख तब होता, जब कोई अपने सपनों को खुद ही छोड़ देता।
एक दिन, उसने एक लड़की को देखा—वो छत पर बैठी थी, आँखों में अनगिनत सवाल और दिल में अधूरे ख्वाब। लड़की धीरे से बोली,
“काश… कोई जादू होता, जिससे मैं सब ठीक कर पाती।”
आयरा मुस्कुराई। उस रात, जब चाँद अपनी पूरी रोशनी में था, वह धीरे से धरती पर उतरी। उसने लड़की के पास जाकर उसके सिर पर हल्के से हाथ रखा। कोई चमक नहीं हुई, न कोई तेज़ रोशनी—बस एक शांति-सी फैल गई।
“तुम्हें जादू चाहिए?” आयरा ने धीमे से पूछा।
लड़की चौंकी, “तुम… कौन हो?”
“मैं वही हूँ, जिसे तुमने कभी सपनों में देखा था… पर तुमने मुझे भूल दिया,” आयरा ने कहा।
लड़की ने उदास होकर कहा, “मुझे जादू चाहिए, ताकि मेरी ज़िंदगी बदल जाए।”
आयरा हल्के से हँसी, “जादू बाहर नहीं, तुम्हारे अंदर है। फर्क बस इतना है कि तुमने उस पर भरोसा करना छोड़ दिया है।”
फिर उसने लड़की को एक छोटा-सा चमकीला कण दिया—जो किसी तारे का टुकड़ा लग रहा था।
“ये क्या है?” लड़की ने पूछा।
“ये तुम्हारा ‘विश्वास’ है। इसे संभाल कर रखना। जब भी लगे कि कुछ नहीं हो सकता, इसे याद करना… और देखना, रास्ते खुद बन जाएंगे।”
इतना कहकर आयरा वापस आसमान में चली गई।
धीरे-धीरे, लड़की ने अपने डर को छोड़ना शुरू किया। उसने छोटे-छोटे कदम उठाए—और हर बार, वो चमकीला कण उसे याद दिलाता कि वो कर सकती है।
कुछ महीनों बाद, वही लड़की मुस्कुराते हुए आसमान की तरफ देख रही थी। उसकी आँखों में अब सवाल नहीं, चमक थी।
ऊपर, बादलों के बीच खड़ी आयरा भी मुस्कुरा रही थी। उसे पता था—उसने कोई चमत्कार नहीं किया… उसने बस किसी को उसका खुद का जादू याद दिलाया है।
और तभी, आकाशलोक में हल्की-सी बारिश हुई—इस बार पानी की नहीं, बल्कि नए सपनों की।
कहानी का जादू यही है—कि असली परी बाहर नहीं, हमारे अंदर ही रहती है… बस उसे पहचानने की देर होती है। ✨