यूं ही किताब के पन्नों को पलटता रहा ,
यूं ही शब्दों के भंडारे में उलझता रहा ,
लोग कहते हैं कि किताबों से नसीब बनती है,
न जाने क्यूं मै इन किताबों से ही नसीब बनाता रहा ।।
इन किताबों की रोशनी, न जाने क्यों तड़पाता रहा ,
मेरी अंदर की इंसानियत इन किताबों से मरता रहा ,
नसीब के बनाने के चक्कर में , अपनों को भूलता रहा ,
न जाने क्यूं मै इन किताबों से ही नसीब बनाता रहा ।।
shivam
@shayrishiv
©shayrishiv
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