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कलम और मेरी अभिलाषा

चिंताओं को व्यक्त कर देना मेरी कलम की निशानी है
और हर बुराई को व्यक्त कर देना ए तो इसकी नादानी है
वक्त कैसा भी हो क्रांतिकारी बना देती है य कलम मुझको
नहीं बोलना चाहता नगर इंसानियत को रास्ता दिखाती है
लिखते ही रहना और कभी न रुकना जैसे योद्धा युद्ध में हो
आज अगर नहीं लिखोगे ये फिर मानवता को देखकर लेख
बेहतर है कि मैं कलमकार हूं कलम के धर्म को जानता हूं
ये सिर्फ पीड़ा शोषण मानवता लाचारी करुणा और कृतज्ञ
जब कोई कलाकार अपनी कलम को बेच देता है तो शायद
वह प्राणों से जिजीविषा और करुण अंतरात्मा बेचता है
मुझे नहीं पता कि तुमने लिखना बंद कर दिया होगा आज
मगर मेरे लेखनी ने आज भी धर्म ग्रंथ पुराण उपनिषद और

कल्पना और धर्म आस्था विश्वास और अंधविश्वास की बिंब सबकुछ समाया है सिर्फ एक कलम और उसकी अंतरात्मा
बहुत कुछ खोजते हो इस संसार में और अपने अंतर्मन मे
अगर कहीं मिल जाता है तो तुम उसे उतार देते हो पृष्ठ पर
बहुत एक कोमल और भावुक और करुणा की तस्वीर है
सिर्फ अपने ही नेता दूसरों के जज्बात मिलते हैं कलम से
बेहतर होता कि तुम इसको समझ कर तुम इतिहास लिखो कौन पूछता है तुम्हें तुम्हारे में कलम के लिखने से इतिहास
आज कहीं भी पूजा जाता है तो सिर्फ तुम्हारी लेखनी की उसके द्वारा लिखे ग्रंथ,पुराण,वेद ,उपनिषद और संविधान
आज पूजनीय है मंदिर में शिल्पकार की मूर्ति में कला को
बेहतर होता कि तुम अपने क्रांतिकारी स्वभाव को लिखो
©lawnishtha